Skip to main content

अगर नाक न होती.


बहुत पहले मैने एक व्यंग्य पढ़ा था जिसका शीर्षक " अगर नाक न होती थी" जिसमें एक बात मु झे सौ गुना  सच लगी कि हमारे यहाँ नाक को लेकर हर तरह के मुहावरे बनाए  गए हैं जिसमें ' नाक झुक  जाना ' शार्मिदा  होना ' नाक कट जाना ' बदनामी होना ' नाक भौह सिकोड़ना ' मुह बनना जैसे मुहावरे अक्सर हम सुनाते हैं आज भी अपनी नाक ऊंची रखने के लिए लोग कितना त्याग कर देते हैं केवल इस लिए कि समाज में हमारा सम्मान कम न हो.

हमारे यहाँ नाक को क ई उमा भी दी गयी है  . 

ये तो भविष्य के गर्भ में है कि आने वाले समय में  ल़ोग समाज में अपनी नाक ऊंची रखने के लिए अपने सपनों और ख्वाहिश का कितना बलिदान देते हैं फिर भी आज के समय में नाक ऊंची रखने के लिए लोगों का बड़ा संघर्ष चल रहा है जो एक गम्भीर लेखक को ये शीर्ष क  कहने को मजबूर करता है कि ' अगर नाक होती ' तो क्या कल्पना की जाती सम्मान आत्मसम्मान, त्याग बलिदान की.

सोचिए आप और हम अगर नाक न होती तो कैसे होते हम??

Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..