रण




" जब सच खबर में आने से पहले ही मार दिया जाता है और तब जो खबर दर्शक के सामने पेश की जाती है वो खबर नहीं होती.


ऐसी ही कहानी हैं ' रण मूवी' की जिसकी कहानी में एक टीवी एंकर विजय हर्षवर्धन मलिक ( अमिताभ बच्चन) की है जो सच्ची खबर देने में विश्वास करते हैं वही दूसरा न्यूज़ चैनल मिर्च मसाला लगाकर पेश करते है 

 अपने चैनल को नंबर बनाने के लिए एंकर विजय का बेटा जय (सुदीप)  को प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब देखने वाले  मोहन पांडे (परेश रावल )पैसे देते है  इस शर्त पर की वो एक झूठी खबर के जरिये वर्तमान में  

 सरकार को गिरा देते हैं

जिसका पर्दाफाश विजय मालिक के चैनल में काम करने वाला 

     इन्वेस्टिगेटिंग जर्नलिस्ट पूर्व (रितेश देशमुख) करता है और 

विजय मालिक को इस सजिश के बारे में बताता है पहले तो वो इसका विश्वास ही नहीं करते कि लेकिन सबूत देखने के बाद वो इस पर विश्वास कर लेते हैं और अपने एक कार्यक्रम में पूरी सच्चाई सबके सामने पेश करते हैं और सब का पर्दाफाश हो जाता है 

इस फिल्म में एक सबसे बड़ी कमी अगर दिखाई देती है तो वो ये है कि यहाँ पर एक जगह ऐसा लगता है कि सबसे ज्यादा ध्यान केवल पूर्व ( रितेश देशमुख) पर ही किया गया है वहीं दूसरी ओर एक बात जो थोड़ी असाधार ण सी लगती है कि जब विजय मालिक एंकर जनता को न्यू ज चैनल के जरिए सबकुछ बता रहे होते हैं तो उसे ये खबर में किसी तरह की कोई मुश्किल का सामना करते हुए नहीं दिखाया जाता परेश रवल ने अपने रोल को बखूबी निभाया है 

इस फिल्म की सबसे बड़ी जीत ये कही जा सकती है कि वो मीडिया जगत के एक दूसरे सच को जनता को बताती है जो अक्सर सुर्खियों में नहीं आ पाता है साथ ही इसकी डायरेक्टिंग से लेकर स्क्रिप्टिंगभी बहुत अच्छी है 

इस मूवी का गान मीडिया और राजनीति की सच्चाई पूरी तरह से बयां करता है.

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