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𝗧𝗶𝗺𝗲 𝗧𝗮𝗯𝗹𝗲

आधुनिकीकरण की देन है

घड़ी  एक घर में जितने लोग नहीं होते उसे कही ज्यादा घड़ी होती है जिसके अनुसार हर काम होते हैं और घड़ी के टाईम को देखने के लिए हाथ की घड़ी से लेकर कम्प्यूटर के टूलबार में लगी घड़ी का हम उपयोग करते हैं और समय को देखते हैं सुबह कितने बजे उठना है कॉलेज, स्कूल और ऑफिस जाने से  लेकर हर चीज हम घड़ी के अनुसार करते हैं.
𝗧𝗶𝗺𝗲 𝗧𝗮𝗯𝗹𝗲 न्यूनिवर्सटी का होता तो एक है किन्तु सब लोग उसके अनुसार आते और जाते हैं कोई इसमें ज्यादा विशेष नहीं होता  समय सबके लिए एक जैसा होता है.
आज के दौर में हम इस घड़ी के इतने ज्यादा उपयोक्ता है कि हमारे हर काम इसको  देखकर होते हैं जिस दिन घर की सारी घड़ी बंद हो जाएं , उस दिन  हमें सबसे ज्यादा जल्दी घड़ी को ठीक करने और घड़ी में सेल डालने की होती है.
जिंदगी का टाईम लेबल भले सबका अपनी प्रतिदिन के दिनचर्या जैसा हो किन्तु सबकी एक ही जैसी घड़ी होती
है किसी को 24 घंटे से ज्यादा समय नहीं  मिलता  किन्तु फर्क महज इससे होता है कि कोई खुद के व्यक्तित्व  बनाने के लिए उस समय का ऐसा उपयोग करता है कि वो भीड़ में होकर भी अलग हो जाता है 
घड़ी तेरी सबको पड़ी 
तेरा रूकना लगता है कि जीवन ही रूका सा गया है
तेरे  आगे हर अमीर शख्स झुक गया है तेरी कसौटी पर उतरता हर कोई नहीं 
पैसे से तुम घड़ी खरीद सकते हो समय नहीं.

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..