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मस्तिष्क और याद्दाश्त का सम्बन्ध


कभी कल्पना कि है क्या अपने कि अगर हम किसी चीज को याद रखने की क्षमता नहीं रखते तो हमारे कोई काम नहीं होते यहाँ तक कि एक राज्य चलने वाले राजा को ये भी नहीं मालूम होता कि उसे जनता से कितना टैक्स वसूलना है जैसे जैसे मानव विकास करता गया वैसे वैसे उसने अपने मस्तिष्क का उस तरह विकास किया जिससे कि वो किसी चीज को याद रख सके . 

आदिमानव से पहले जब दुनिया में  सेपियन्स    ( मानव) था उसने भविष्य के बारे में सोचने की कल्पना तब कि जब उसने कृषि क्रांति को देखा और उसने इस पर ध्यान दिया कि एक समय पर फसल ज्यादा तेजी से उगती और विकसित होती है.

और उसने भविष्य के लिए ये अनुमान लगाया कि अगर आने वाले समय में बारिश होगी तो फसल अच्छी होगी अगर हम ये मालूम चल जाएं कि बारिश किस हिसाब से होगी तो हम उस के अनुसार नदी खोदे.

आज घर की चाबी रखने से लेकर किसी अनजान व्यक्ति के नाम और चेहरा याद रखना आज भले ही आसान है किन्तु एक समय उसके लिए मनुष्य ने अथक परिश्रम किया था . 

मौजूदा समय में मनुष्य की प्रतियोगिता एक रोबोट से होने वाली है जो उसकी तुलना में चीजों को सीखने में अधिक तेज होगा किन्तु मनुष्य और उसमें केवल एक अंतर सबसे बड़ा होगा कि मनुष्य में सही और गलत को अंतर करने की क्षमता उसे ज्यादा होगी वो मानव की संवेदना को एक मनुष्य से कम समझेगा.

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..