एक पक्ष को देखकर बोलना क्या सही है


वैसे तो सभी देशवासियों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार है उन्हें अपने विचार को रखने की आज़ादी है वो कही भी बसने की आजदी रखते हैं फिर भी जब क ई बार जमीनी स्तर पर इसे रखकर देखे तो दृश्य कुछ अलग सा होता है लोग समान होकर भी समान नहीं होते एक बस में बैठकर भी समान नहीं होते और कभी कभी तो हद ही हो जाती है जब एक तरह के लोगों को ज्यादा दूसरों को कम महत्व दिया जाता है.

स्कूल में यूनिफॉर्म रखने का मकसद क्या है इसका उत्तर सबका भिन्न हो सकता है किन्तु इसे लाने की क्यों जरूरत है इसमें सब अपना सामान्य मत देगे कि सब एक जैसे वेषभूषा में जब होगे तो किसी में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होगा.

आज भले ही हम और आप आरक्षण का विरोध एक तबके का सिर्फ इसलिए करते हैं क्योंकि हम कुछ लोगों को उसका दुरूपयोग करते देखते हैं किन्तु जब कुछ लोग अपनी प्रतिभा और कौशलता के कारण भी उस स्थान पर नहीं पहुंच पाते तो हम कुछ नहीं बोलते हम अपने विचार हमेशा रखते समय ये ध्यान रखना चाहिए कि ये हर तबके के लिए सही है कि नहीं

वैसे भी आज भी क ई गलियारों में समानता की पहुंच दूर दूर तक दिखाई नहीं देती.

हम बेबसी कहे किसी की 

हम भी चाहते हैं पढ़ना

फिर भी नहीं पढ़ पाते

काम करने का मन नहीं 

फिर भी हम काम करते

कब होगे हमारे पास भी सुंदर कपड़े

ये अक्सर हम अपने माँ बाप से पूछते

क्या इतनी समानता के बावजूद भी पिछड़े हैं हम.

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