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critical appraisal skill

 

 आज जब स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेक अफवाह का जाल बुना जा रहा है ऐसे में हमें साक्ष्य पूर्ण स्वास्थ्य पत्रकारिता करने की बहुत जरूरत है.

 आखिर क्या होती है साक्ष्य पूर्ण पत्रकारिता?

 व़ो पत्रकारिता जिसमें किसी भी साक्ष्य को प्रकाशित करने से पहले उसकी सत्यता को डेटा अनुसंधान से सावधानी पूर्वक परखने की क्षमता का होना है.

 जिसका उद्देश्य जनता को उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाली गलत जानकारी से दूर रखना .

 आप इसे उदाहरण से समझ सकते हैं कि अभी देश में कोरोना की वैक्सीन लगने पर जोरो शोरो से काम चल रहा है .

 ऐसे में कोई व्यक्ति ऐसी कोई बात कहता है जो वैक्सीन की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए तो "उसे जागरूकता के लिए साक्ष्य आधारित पत्रकारिता"की जरूरत है.

 वैक्सीन के बारे में साक्ष्य आधारित रिर्पोटिंग

 *वैक्सीन व्यक्ति की रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ा देती है.

 *इसे शरीर को किसी तरह का कोई नुकसान नही पहुंचता.

 वैक्सीन लगाने पर व्यक्ति के साथ दो तरह की घटना होती है-

 1. सामान्य श्रेणी की दुर्घटना - नान सीरियस इवेंट- जल्द ठीक होने वाला बुखार या अस्वस्थता.

 2. गंभीर श्रेणी - जिसमें व्यक्ति के स्वास्थ्य को खतरा हो.

 गंभीर

 AEFI

 अंतर समझना जरुरी है

 1. इंजेक्शन रिएक्शन

 2 वैक्सीन रिएक्शन

 3प्रोग्राम एरर

 4 संयोगवश होने वाली दुर्घटना

 दो दुर्घटना

 1. टीककरण के बाद की दुर्घटना

 2. संपादकीय दुर्घटना

 आज हम हर चीज को महत्व दे रहे हैं फिर स्वास्थ्य पर देना और अति आवश्यक होता है जिस तरह गलत दवा हमारे शरीर को बुरा प्रभाव डालती है उसी तरह अफवाह या जानकारी होती है इसलिए अगली बार अगर आप कोई संदेहास्पद खबर देखे तो उस पर बिना जांचे परखे विश्वास न करे.

 जनहित में जारी.

 Source( Unicef)

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Today Thought

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हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..