चलना जीवन है रूकना मृत्यु है


तमाम परेशानियों के बावजूद जो लोग अपने काम को कर रहे हैं वो हर दिन अपने जीवन को बेहतर

बना रहे हैं और वो लोग जो थोड़ी परेशानी में अपने काम को छोड़ रहे हैं वो स्वयं अपने काम के प्रति लापरवाह है.

हम अगर थोड़ी परेशानी से अपने काम को करने में समर्थ नहीं तो हम स्वयं का बहुत कुछ बिगाड़ रहे हैं दूसरे का बिल्कुल भी नहीं.

जीवन चलते रहना का नाम है जहाँ दुख और सुख दोनों है किन्तु हम थोड़े दुख से परेशान ह़ो जा रहे हैं जबकि असल परेशानी का तो हमने अभी तक चेहरा ही नहीं देखा है इस सम्बन्ध में रतन टाटा का कथन था कि हम अक्सर अपने टीचर की बातो का बुरा मान जाते हैं जबकि हमारा उस समय बोस नाम के व्यक्ति से मिलना ही नहीं होता है.

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