कितने कांटों के बीच पली
कितने दर्द को सहती नन्ही कली
तेरे खिलने से पहले
कितनों को तेरी जरूरत पड़ी
कितने तुझे पहले ही पेड़ से तोड़ देते
किन्तु पेड़ को तेरी कमी न खली
हे गुलाब की कली
तु कितने तूफान से लड़ी
अक्सर तेरी जरूरत सबको पड़ी.
कितने कांटों के बीच पली
कितने दर्द को सहती नन्ही कली
तेरे खिलने से पहले
कितनों को तेरी जरूरत पड़ी
कितने तुझे पहले ही पेड़ से तोड़ देते
किन्तु पेड़ को तेरी कमी न खली
हे गुलाब की कली
तु कितने तूफान से लड़ी
अक्सर तेरी जरूरत सबको पड़ी.
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