ऐसे चलना है वैसे नहीं
ऐसे बोलना है वैसे नहीं
कहते रहते हैं लोग हम से
जरा उन लोगों को भी कुछ सिखा
दो
जिनकी नियत कब बदल जाएं
किस को क्या मालूम,
उन को भी इंसानियत निभाना सिखा दो
हम पर बात बात पर प्रश्न उठाते हो
होता हमारे साथ गलत है फिर भी सवाल हमारे चरित्र पर ही उठाते हो,
क्यों नहीं सिखाया किसी माँ ने पुत्र को
एक स्त्री की कोख से जन्म लेकर
किसी परायी स्त्री की पवित्रता भंग करने का साहस न करना
क्यों याद नहीं तुम्हे अपना इतिहास
कि द्रोपदी के अपमान से शुरू हुआ था
महाभारत का इतिहास.
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