सुनना बंद हो गया है


हर कोई आज सिर्फ अपनी बात किसी व्यक्ति को बोलना चाहता है लेकिन न सुनने का तो जैसे उसने खुद से वादा कर लिया है कि अब वो किसी व्यक्ति को कोई बात नहीं सुनेगा किन्तु व़ो बोलेगा एक अच्छा संचार करने के लिए भी जरूरी होता है कि व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की बात ध्यान से सुने जो कि सबसे मुश्किल काम होता है .

आज हर कोई ये दूसरे व्यक्ति से अपनी बात बोलने के लिए बेताब है किन्तु वो दूसरों की बात को सुना ही नहीं रहा है.

वर्तमान समय में अगर हम इस देखे तो ये संवाद की कमी सा दिखाई देता है जहाँ एक ही व्यक्ति बोल रहा है दूसरा व्यक्ति सिर्फ सुन रहा है.

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