विश्व हिन्दी दिवस

 

"हिन्द से हिन्दी बना

हि से हिन्दुस्तान बना

जिसकी सरलता ने

 हर दिन अपने आप  को न ए रूप से गढ़ा"

प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी को हिन्दी दिवस मनाया जाता है जिसे मनाने का उद्देश्य लोगों को हिन्दी के प्रति जागरूक करना है विदेश में रहने वाले भारतीय लोग इस दिवस को मनाते हैं.

इस दिवस को मनाने की घोषणा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान की थी जिसके चलते प्रत्येक वर्ष यह दिवस बड़ी उमंग के साथ मनाया जाता है जबकि 14 सितम्बर को राष्ट्रीय हिन्दी दिवस मनाया जाता है इस दिन भारत ने हिन्दी को राज्यभाषा का दर्जा दिया था जिसमें महात्मा गांधी की अहम भूमिका थी.

हिन्दी भाषा जिसकी लिपि देवनागरी है जिसने हमेशा स्वयं को बदला है और दूसरी भाषा को अपने अंदर समाहित किया है जिसके चलते आज पूरे में विश्व में हिन्दी भाषा बोलने वाले की संख्या अधिक है हिन्दी की सरलता ही उसका सबसे बड़ी ताकत है आज जहाँ एक ओर हम संस्कृत भाषा की कठिन होने के कारण उसे दूर होते गए वहीं उर्दू में भी गजलों के अलावा उसमें न तो ज्यादा विकास किया गया और न ही उसमें ज्यादा रचना लिखी गयी जबकि वो भाषा सबसे संस्कारी भाषाओं में से एक है वही संस्कृत एक वैज्ञानिक भाषा है किन्तु ये अफसोस कि बात है कि आज दोनों भाषा बोलने वाले की संख्या बहुत कम है.

पर हिन्दी आज भी मौजूद है ये बात अलग है कि आज उसे अपने अस्तित्व के लिए लड़ाई लड़नी होती है.

आज हम सब के दिल में अंग्रेजी भाषा का भम्रजाल इस तरह से है कि हम हिन्दी में बात करते हुए उन्हें अंग्रेजी में लिखते हैं.

जबकि हम सब को ये विचार जरूर करने की आवश्यकता है कि अगर आने वाले समय में हमारे बच्चे सिर्फ ग्वारपाटा को सिर्फ एलोवोरा और इतवार को सिर्फ संडे समझने लगे तो हमारे बीच बहुत बड़ा अंतर आ जाएगा हमें ये बात समझनी होगी कि जिस तरह हम अपने बच्चें को अंग्रेजी सीखने पर जोर देते हैं उस तरह हिन्दी सीखने पर भी बल देे क्यों कि ये हमारी मातृभाषा और राज्यभाषा है

और अपनी माँ से अलग होना एक तरह के बड़े त्याग जैसा है .


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