Balance of power

अंतर्राष्ट्रीय राजनीति

  के पाठ्यक्रम में हमें पढ़ाया जाता है कि शक्ति में संतुलन होना कितना जरूरी होता है 

जिसकी शुरुआत दो लोगों की ताकत से शुरू होकर दो देशों की शक्ति तक पहुँच जाती है . 

जिसमें ये सामान्य रूप से देखा सा जाता है कि एक ताकतवर देश किस तरह दूसरे देश को दबाव रहा है और दूसरा देश किस तरह से उसके आगे झुकने को मजबूर हो रहा है इस असमानता को दूर करने के लिए अंर्तराष्ट्रीय राजनीति में शक्ति का संतुलन सिध्दांत का सूत्रपात किया जाता है

जिसका उद्देश्य शक्ति का बंटवारा सामान्य रूप में रखने से होता है.

जबकि इसी को हम तराजू पर रखकर देखे तो जिसकी पलड़ा भारी वो ही दूसरे पर राज करता है दो पलड़े बराबर हो ऐसी स्थिति कम होती है किन्तु जब कभी ऐसा शुभ अवसर आता है तो वो न केवल उस सिध्दांत को बल्कि हर वो चीज को गलत साबित कर देता है जो ये कहता है कि पांच अगुली बराबर नहीं होती जबकि आजकल उगुली को खिचकर बड़ा करने का चलन सा चला रहा है भले ही ऐसा करते हम क्षतिग्रस्त ही क्यों न हो जाएं

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