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हम भारत के लोग

                    

                      भारत का संविधान

उद्देशिका

हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व- सम्पन्न, समाजवादी, पथ - निरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को ;

सामाजिक, आर्थिक, और राजनैतिक न्याय,विचार, अभिव्यक्ति , विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,

प्रतिष्ठा और अवसर की समता

प्राप्त करने के लिए,

तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और

राष्ट्र की एकता अखंडता

सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए

दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज 26 नम्बर, 1949 को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मर्पित करते हैं

आज भारत में जो घटनाएं

   घटित हुई है उसकी जितनी निंदा की जाए उतनी कम है वो भी  जिस दिन भारत अपना राष्ट्रीय दिवस मना रहा हो हम सब भारतवासियों को ये बात नहीं भुलानी चाहिए कि हम हमेशा दूसरे देशों को अहिंसा की राह दिखाते रहने वाले राष्ट्र पिता महात्मा गांधी के देश के लोग है.

हमारे द्वारा किया गया कोई भी ऐसा कृत्य जो हमारे देश की छवि धूमिल करता है जिसे दूसरे देशों में हमारे देश की गलत छवि बनती है इस बात को हमें नहीं भूलनी चाहिए

  भारत देश शांति का परिचायक रहा है  इसे बनाए रखने की कृपा करें.

     जय हिंद जय भारत

( विजय विश्व तिरंगा प्यारा झण्डा ऊंचाई रहे हमारा)

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..