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अर्थव्यवस्था


अर्थव्यवस्था का ज्ञान भले ही सीधे रूप से ज्यादा लोगों को न हो किन्तु अप्रत्यक्ष रूप में हम सब इसे जुड़े हुए हैं.

अर्थ से आशय धन से है तो वही व्यवस्था से आशय उसके प्रबंधन से है जो अपने जीवन में पैसे का प्रबंधन जितने अच्छे से करता है उसका जीवन उतना  अच्छा  होता है.

अर्थव्यवस्था के पितामह एडम स्मिथ

भले  हो लेकिन भारत में सबसे अच्छे अर्थव्यवस्था के जानकर कौटिल्य ( चाणक्य) रहे हैं जिनकी हस्तलिखित किताब कौटिल्य अर्थशास्त्र में हर चीज के प्रबंधन के बारे में विस्तार पूर्वक लिखा हुआ है.

आज समकालीन समय कोरोना महामारी ने जहाँ विश्व की बड़ी से बड़ी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है तो वही कोरोना ने उसे काफी हद तक बदल भी दिया है.

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..