आज ईसाई धर्म का सबसे बड़ा त्यौहार है जिसे हम सब क्रिसमस के नाम से जानते हैं इसे बड़े दिन के नाम से भी जाना जाता है इस दिन प्रभु ईसा मसीह ( जीसस क्राइस्ट) का जन्म हुआ था.
जिन्हें लोगों का मसीह कहा जाता है जो लोगों की समस्याएं सुलझाने और उन्हें परमात्मा के बारे में बताने के लिए धरती पर भेजा था वो आम इंसान होकर भी आम नहीं थे उन्हें ने पहला चमत्कार एक अंधे की आंखों में मिट्टी लगाकर उसकी आंखो मे रोशनी दी थी.
वहीं दूसरा चमत्कार जब उन्हें पांच रोटी और कुछ मछली से करीब 5000 से ज्यादा लोगो को भोजन कराया था.
जिस पर ईसु ने कहा था कि तुम सब लोग मेरे नहीं बल्कि अपनी भूख शांत करने के लिए इस रोटी के लिए मेरे साथ आ रहे हो लेकिन मैं तुम से कहना चाहता हुं कि तुम वो काम करो जो तुम से मेरा पिता ( परमात्मा) कराना चाहता है.
उनके द्वारा किए गए हर चमत्कार को सिध्द करने के लिए कोई न कोई साक्षी जरूर होता है.
अंत उनका बहुत कष्ट प्रद रहा है उन्हें क्रूस पर लटक दिया और उनके हाथों में किले ठोक दी जो कुछ यहूदियों के कट्टर पंथी लोगों की प्रभु को झूठा साबित करने की एक योजना तो थी .
इस बीच एक अनोखा काम हुआ जिस राजा ने उन्हें
क्रूस पर लटकाया था उनके बेटे को जीवित स्वयं ईसु ने किया था जिस कारण उन्हें ' यहदियो का राजा' घोषित किया और एक नेमप्लेट पर तीन भाषाओं में 'यहूदियों का राजा' लिखा '.
वो हम सब के लिए एक ऐसा फरिश्ता था जो सब की फरियाद को सुनता और उस पर काम करता था.
आज वो हम सब के बीच में एक ऐसी आस्था और विश्वास के रूप में मौजूद है जिन्हें सिर्फ वो ही देख सकता है जिन्हें उन पर विश्वास है...


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