एक रूपये के चक्कर में


एक रूपये की कीमत भले ही हम और आप न समझे किन्तु बस वाले इसे बहुत समझते हैं एक रूपये कम देने पर अक्सर वो आधे पैसे की पर्ची कांट देते हैं और बाकी पैसे अपनी जेब में डाल लेते हैं और ज्यादा कहने पर वो हम से वो एक रूपये भी लेते हैं और फिर दूसरी पर्ची कांट देते हैं . 

यह एक बात गौर करने वाली है जहाँ हम अक्सर एक रूपये को इस कारण, उसे लेने में संकोच करते हैं कि ये तो एक रूपये ही है वहीं वो उस एक रूपये की कीमत के चलते कितने पैसे अपनी जेब में डाल लेते हैं.

समझदार बनिए . 

रुकिए और सोचिए 

कही आपके साथ भी तो 

नहीं हुआ ऐसा.

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