अक्सर हम उन लोगों को देखकर ये आम धारणा बना लेते हैं कि उसकी जिंदगी तो कितनी बेहतर और आराम दायक है काश हमारी भी जिंदगी उनकी तरह होती सारी परेशानी हमारे ही पास है वो अपने काम में कितना बेहतर है लेकिन हम ही इतने ना समझ है एक हम ही कितनी परेशानी में जीवन यापन कर रहे हैं.
जबकि सच्चाई इसे अलग होती है जरूरी नहीं जो जैसा दिखाई दे वो वैसा ही हो हम हमेशा किसी भी व्यक्ति की सफलता और उसकी ऊंचाई को देखते हैं और भूल जाते हैं कि वो भी इंसान है हमारे जीवन में क्या सकरात्मक है और क्या नकरात्मक है ये हम पर निर्भर करता है कि हम उसे क्या समझते हैं क ई बार हम सकरात्मक चीज को भी नकरात्मक समझने लगते हैं क्योंकि हमारे लिए सकरात्मक सिर्फ सफलता है जबकि ऐसा है नहीं आज आप किसी भी सफल इंसान के बारे में पढ़ेंगे तो जानेगे की वो अपने जीवन में कितनी विषम परिस्थितियों से गुजरा है उसने कितना कुछ सहा है लेकिन उसने अपनी असफलता को नकरात्मक ता न समझकर उस एक सफल होने की कड़ी समझी और वो आगे चलता गया और वो सफलता की चोटी तक पहुंचा.
आप कितनी गलतियां करते हैं और अपने जीवन में कितना सफल हुए इसे ज्यादा फर्क पड़ता हैं कि हम खुद को सफलता के कितने करीब देखते हैं.

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