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महिलाओं की शक्ति को बताती कहानी मूवी


कहानी मूवी मुख्य रूप से एक विद्या नाम की महिला की कहानी है जो अपने पति को खोजने बैगलुर आती है जहाँ वो एक तरह से पुलिस की मदद एक बड़े अपराधी को ढूढने में करती है लेकिन इस मूवी की कहानी अंत में अपने नाम को स्पष्ट करती है जहाँ वो अपने पति के कातिल मेट्रो दुर्घटना के अपराधी मास्टर माइंड को पकड़ती और कुछ को मौत के घाट उतरती है.

इस मूवी को दैवीय शक्ति के रूप में नारी को दुर्गा पूजा के प्रतीक को लेकर पेश किया गया है.

इस की स्किप्ट एक महिला ने की है जिन्होंने महिलाओं को एक अलग नजरिये के रूप में पेश किया है.

इस कहानी का गीत जो रवींद्र नाथ टेगोर की कविता 'एकला चलो रे' बंगली भाषा के मिठास घोलता है.

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..