मोची वाले भाईया


कहते जो जरूरत में काम आए वहीं आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण हो जाते हैं ऐसे में उनलोगों का महत्व और भी बढ़ जाता है जिनके काम को देखकर हम अक्सर उन्हें काम आकने लगते हैं कि वो तो दूध वाला, सब्जी वाला है हम से क ई लोग की ये आदत  होतीं हैं कि पैसे का मोल भाव इतना करना लेना कि सामने वाले व्यक्ति को भले ही नुक्सान ही क्यों नहीं हो रहा हो हम अपने आप को होशियार समझने लगते हैं और दूसरी ओर मंहगे मॉल में जाकर  सामान खरीदने पर एक पैसा ज्यादा ही खर्च करते हैं.

जैसे जैसे देश में तकनीक आ रही है आधुनिकरण के नाम पर हर चीज डिजटलाईज हो रहा है वैसे हम उन दुकानों से पिछड़ने लगे जिनकी हम कभी भूले भटके सुध लेते थे.

अगली बार अगर आप किसी भी मोची वाले के पास  जाएं तो उसे मोल भाव करने की वजह उस उसके काम का सही मूल्य दे .


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