अक्सर हमें लगता है कि दोस्ती से बड़ी कोई चीज नही दोस्त से बड़ा कोई और नहीं लेकिन कभी कभार हम ऐसी परिस्थितियों में फंस जाते हैं जहाँ पर हमें ये समझ आता है क ई बार आप जिसे दोस्त समझते हैं वो आप से ऐसी कड़वी बातें कहता है जिसे सुनकर लगता है कि जिसे मैं अब तक दोस्त समझ रही थी वो मेरा दोस्त ही नहीं.
जब दूसरे आपको ताना कसे तो बहुत बुरा लगता है लेकिन जब अपने ही किसी चीज को लेकर दूसरे के सामने तंज कसे तो ये और भी बुरा होता है.
हम इसे स्वीकारे या न स्वीकारे लेकिन ये सच्चाई है अक्सर जिसे हम अपना सबसे अच्छा दोस्त समझते हैं वो ही हमें इस तरह सब के सामने पेश करता है जैसे उसे अच्छा और हम से बुरा कोई और नहीं.
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