वो जो धूप सहकर कड़ा परिश्रम कर अपने पसीने और खून से एक खेत सींचता है और उसमें खेती करता है रवी हो या खरीफ की फसल वो अपने काम हर मौसम में करता है.
उसके लिए सबसे ज्यादा बड़ी उपलब्धि उसकी फसल के सही मूल्य मिलना और लागत से अधिक दाम कमाना होता है लेकिन जब इसी चीज के लिए उसे संघर्ष करना पड़ता है तब हम लोगो को ये समझना चाहिए.
आज भले ही लोग भष्ट्राचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले अन्ना हजारे आंदोलन को हम भूल गए हो किन्तु वो अन्ना हजारे को न कल भूले और न आज.
आज भारत में 'किसान दिवस' मनाया जा रहा है वही दूसरी ओर किसान को आंदोलन करते आधा महीना बीत गया है और बात अभी भी वही है जहाँ पहले थी लेकिन इस बीच हम भारत के 15 से ज्यादा किसानों को खो चुके हैं.
लेकिन मुद्दा वहीं है जहाँ कल था .
आज समकालीन समय में जब देश से लेकर विदेश में कोरोना वायरस का नया स्टोन मिलने के कारण सब जगह संकट के बादल छाए हुए हैं वही भारत में किसान आंदोलन के चलते सब की निगाहे सरकार पर टिकी है अब देखना ये ही की किसान की बातों को कब माना जाएगा .
इसी के साथ हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि इस देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल भी किसान थे महात्मा गांधी किसान के पक्ष में अंग्रेजों के सामने खड़े थे.
लाल बहादुर शास्त्री ने "जय जवान जय किसान "का नारा दिया था.
वहीं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जिन्हें किसान नेता कहा जाता है उन्हें किसान के लिए जमींदारी उन्मूलन विधेयक के कल्याणकारी सिद्धांत लाए थे.
1979 में वित्त मंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्रीय कृषि व ग्रामीण विकास बैंक [नाबार्ड] की स्थापना की। उनके जन्म दिवस को प्रत्येक वर्ष 23 दिसम्बर को ' किसान दिवस 'के रूप में मनाया जाता है.
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