हमारी जिंदगी में एक चौराहा जरूर होता है जो हमको सोचने को मजबूर कर देता है कि हम कहाँ खड़े और हमें कहाँ जाना है जिंदगी जहाँ हमारे लिए चौराहे की तरह चार रास्ते तो नहीं होते लेकिन दो रास्ते जरूर होते हैं जिनमें से हमें एक चुनना होता है और जहाँ एक रास्ता खतरों से भरा होता है वही दूसरा रास्ता खतरे न देकर हमारी जिंदगी को अर्थहीन बना कर रख देता है जहाँ हमें हर समय सिर्फ ये अहसास होता है कि हमने अपनी जिंदगी में वो नहीं किया जो हमें करना चाहिए.
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।

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