"इस दिवाली क्यों न कोई ऐसा
तोहफा दिया जाएं अपनों को
जो की उसकी जरूरत पूरी करे
और वो उसके काम आऐं
इस दिवाली करे कुछ ऐसा
जिससे किसी के घर में खुशियाँ छाएं"
दिवाली खुशियों का त्यौहार जब घर को सजाने से लेकर नए -नए पकवान बनाने की उमंग सभी घर में रहती है तो वहीं कुछ लोगों के लिए दिवाली का त्यौहार उनके लिए कुछ तोहफो का उनकी जिंदगी में आना होता जिसका वो बेसब्री से इंतजार कर रहे होते हैं जिनमें छोटे बच्चे से लेकर घर के बड़े बूढ़े तोहफो की राह देख रहे होते हैं इसके अलावा कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो हमारे परिवार के सदस्य तो नहीं होते किन्तु वो घर के सदस्य से कम भी नहीं होते जैसे हमारे घर के नौकर और खाना बनाने वाली बाई .
क्यों न हम इस बार तोहफे के रूप में ऐसा कुछ दे जो उनकी जरूरत को पूरा करता हो 'दादा जी के लिए एक नया रेडियो जो उन्हें पुराने गीत सुन सके, दादी के लिए एक नयी साड़ी जिसे पहनकर वो अपने पुराने दिनों को याद कर सके घर की नौकरानी को एक स्मार्ट फोन जिससे उसके बच्चे पढ़ाई कर सके.
वैसे भी तोहफे के मूल्य से भी ज्यादा महत्व उसकी उपयोगिता का होता है.
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