हर चीज की चमक एक समय तक ही अच्छी लगती है
दूर से तो हर चीज भली लगती है
अक्सर जिस खूबसूरती पर हम है मरते
वो खुबसूरती भी एक समय तक ही रहती है ,
सोने की चमक भी खो जाती है एक समय के बाद
न जाने फिर भी क्यों बाजार में
हर चमकती चीज की ही
बोली लगती है ,
क ई , बार किसी को देखते वक्त क्यों
उसकी खूबसूरती ही हमें दिखती है
खूबसूरत तो चाँद और मूयर भी होता है
क्या कभी चांद के ग्रहण पर हमारी नजर पड़ती है
मयूर को नृत्य करते उसे निहरना किसे नहीं भाता
क्यों किसी की नजर उसके पैरो पर नहीं पड़ती है ?
काश परिंदों से लेकर इंसान भी किसी की खूबसूरती को देख पाता
आज भी दुनिया उसकी बाहरी खूबसूरती पर ही मरती है
चांद पर रहने की ख्वाहिश करने वाले
क्यों तेरी नजर सिर्फ किसी की खूबसूरती पर ही पड़ती है,
चमक तो हीरे में भी होती
किन्तु क्या सिर्फ हीरे से ही किसी की जिंदगी
खुशियों से भरती है ?
चमक आती है जाती है किसी की सिरत में
क्यों आज भी एक लड़की अपने रंग के कारण कम आकी जाती है?
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