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दुःख भरे दिन बीते रे भैया



' मदर इंडिया ' मूवी का ये गीत हम सब ने सुना है जिसमें किसान फसल की अच्छी पैदावार को लेके बहुत खुश है  और वो  अपनी खुशी गीत के रूप में व्यक्त कर रहे है . 

आज भी कुछ गाँव में अच्छी फसल की पैदावार होने पर कजरी गीत गाया जाता है.

देश में चुनाव से लेकर एक सरकार बनाने तक किसान के सामने कई लोक लुभानी  योजना बनाई जाती है मुफ्त की बिजली देने का आश्वासन दिया जाता है किन्तु उस किसान की जिंदगी में बिजली तो दूर लालटेन भी बड़ी मुश्किल से नसीब होती है . 

भारतीय हिन्दी सिनेमा ने किसान की स्थिति अपनी फिल्म के जरिए दिखाने की कोशिश की जिसमें 'एक बीघा जमीन 'और 'लगान' जैसी मूवी का एक अलग ही बात है 


तो वहीं देश भक्ति के गीत में सराबोर गीत

 मेरे देश की धरती, सोना उगले उगले हीरे मोती

 जैसे गीत' देश के किसानों को उत्साहित करते हुए दिखाई देते हैं पर अफ़सोस की आज किसान अपनी दयनीय स्थिति के चलते अपने बेटो को किसान बनाना नहीं चाहता क्योंकि वो जानता है कि किसान की भलाई सिर्फ राजनीति के नारों तक ही सीमित है.

तो वहीं दूसरी तरफ देश के पूर्व प्रधानमंत्री के द्वारा दिया हुआ नारा 'जय जवान जय किसान ' आज परिवर्तित होकर जय जवान से जय कॉर्पोरेट' हो चुका है.

फिल्म गीतों की तरह ही उनकी जिंदगी में दुख भरे दिन बीते ऐसी हम कामना करते हैं.

आज समकालीन समय में जब लगातार हमारा अन्न दाता सड़क पर आकर संघर्ष कर रहा है और हमारा ध्यान किसी एक ट्रेंड पर है तो हमें अपने देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को जरूर याद करना चाहिए जो एक किसान परिवार से है जिनके लिए 'कर्म ही पूजा था '.

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..