आज जहाँ अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव खत्म होने वाले है तो वही भारत में आज बाघ प्रदेश 'मध्यप्रदेश' में उपचुनाव है और दूसरी ओर नालंदा विश्वविद्यालय की मातृभूमि बिहार राज्य में दूसरे चरण के चुनाव है.
अमेरिका में चुनाव हम से थोड़े अलग तरह से होते है जहाँ पर चुनाव पंद्रह दिन पहले ही प्रारंभ हो जाते है वहाँ पर वोट डालने के लिए हर राज्य के अलग नियम और दिशा निर्देश होते हैं हमारी तरह उन्हें चुनाव डालने के लिए नौकरी से अवकाश नहीं मिलता और चुनाव से पहले वहाँ पर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार की डिबेट होती है
अमेरिका में किसी भी उम्मीदवार व्यक्ति का पहले काम देखा जाता है जिसके कुछ पैमाने होते हैं जिसमें अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, जीडीपी, रोजगार, विदेशी नीति, और इस पैमाने को ध्यान में रखकर किसी व्यक्ति के कार्य काल का विश्लेषण किया जाता है
अमेरिका में राष्ट्रपति कौन बनता है इसका असर सभी देश पर पड़ने वाला है क्योंकि अमेरिका सबसे बड़ा आयातक और निर्यातक देश है जिस से सभी देश अपनी नीतियां तय करते हैं.
तो वही भारत में चुनाव की प्रणाली थोड़ी अलग है भारत में चुनाव से सम्बंधित सभी नियम चुनाव आयोग तय करता है जहाँ पर चुनाव डालने की एक निश्चित तिथि होती है और वोट डालने के लिए ब्लॉक और वार्ड बनाए जाते हैं
आज लोकतंत्र की परिभाषा जनता के लिए जनता के द्वारा बनाया गया शासन समय के उस भवर में फंसा सा दिखाई दे रहा है जहाँ से उसका निकलना जरूरी है.
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