समय के साथ


' परिवर्तन प्रकृति का नियम ' है हर चीज में परिवर्तन समय के साथ होता है बीज पौधे के रूप में बदलता है पतझड़ में जो पत्ते गिरते हैं एक समय आने पर उन में फिर कली खिलती है.

समय के साथ मनुष्य में भी परिवर्तन होता है किन्तु केवल शारिरिक परिवर्तन से ही ज्यादा असर हम पर नही होता है परिवर्तन हर तरह से होना जरूरी होता है मानसिक रूप से बौद्धिक रूप से सामाजिक रूप से.

हम में से कई  लोगों की पसंद एक समय के बाद बदल जाती है हमें जो सबसे ज्यादा पसंद होता है वो एक समय के बाद हमें पसंद आए ये बिल्कुल भी जरूरी नहीं होता है हम सब एक समय ये जरूर सुनने को मिलता है कि तुम बदल  गए हो . 

आज अगर हम में कोई भी परिवर्तन न हुआ तो हम उस पानी की तरह हो जाएंगे जिसमें एक समय के बाद गंध सी आने लगी है बहती हुई पानी की धारा हमेशा हमारे मन को रास आती है क्योंकि वो लगातार एक छोर से दूसरी छोर तक बहती है हम मनुष्य का जीवन भी लगातार परिवर्तन की ओर अग्रसर होना चाहिए .

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