एक दिवाली ऐसी भी
हर बार करते खुद के आशियाने को रोशन
क्यों न इस बार चंद दियों से करें
किसी के घर को रोशन,
ढ़ेरों बने पकवानों में
क्यों न दे किसी को थोड़े से पकवान
उसके स्वाद को बढ़ाने के लिए
क्यों कैद करे इसकी मिठास को अपने ही घरों में
क्यों न मुस्कुराने की वजह दे
किसी को
एक दिवाली ऐसी भी
क्यों न करे कुछ
अनोखा काम
एक दिवाली ऐसी भी
क्यों न करें कुछ ऐसा
कि किसी चेहरे की उदासी खत्म हो
थोड़े खुशियों किसी के घर पर भी
एक दिवाली ऐसी भी
ऐसा प्रयत्न क्यों न इस बार हो.



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