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नेहरू


आज भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जन्मतिथि है जिन्होंने भारत के लिए क ई ऐसे काम किए जो भारत के लिए एक वरदान के रूप में उभरे चाहे वो भारत को गुटनिरपेक्ष की ओर ले जाना भारत के विकास के लिए पंचवर्षीय योजना बनाना या भारत को शिक्षा के क्षेत्र में न ए आयाम तक पहुंचाने के लिए आईएम और नेशनल स्कूल आफ ड्रामा जैसे संस्थान को खोलना तो वहीं दूसरी ओर भारत को एक महाशक्ति के रूप में समझना.


नेहरू की बात की जाए और उनकी आत्मकथा ' भारत की खोज ' का जिक्र न हो तो ये उनके साथ नाइंसाफी होगी 

भारत की खोज जो करीब 399 पेज की है जिसमें सिधु घाटी सभ्यता , भारत और तकनीक, और भारत की समस्या, भारत और यूरोप की सभ्यता में अंतर जैसे मुख्य बिंदु है जिस पर उनका विचार इस तरह से तथ्यों के साथ लिखा हुआ है मानों वो उनकी आत्मकथा में सामान्य ज्ञान को अपने साथ लिए हुए भारत को न ए प्रकाश की ओर ले जा रहे हो इसमें नेहरू ने अनेक ऐसी बातें कही है जिसे पढ़कर मालूम चलता है कि उनका भारत के प्रति नजरिया कैसा है वो भारत के विषय में एक जगह पर कहते हैं " कि भारत में अनेक धर्म और जाति के लोग निवास करते हैं जिनकी अपनी परंपरा और रीति रिवाज है किन्तु जब वो दूसरे देश जाता है तो वो भारत वासी ही कहलाता है " 

इसके अलावा नेहरू के लिखे हुए इंदिरा को पत्र हमारे लिए एक नया विचार और जोश पैदा करते हैं नेहरू इंदिरा को पत्र में जीवन के लिए कुछ ऐसी बाते लिखते हैं जो सब के लिए एक प्रेरणा जैसी है ' वो कहते हैं कि जीवन में परीक्षा का मतलब केवल परीक्षा के अंक नहीं होते बल्कि अक्सर परीक्षा के बीच में हमारे सामने आयी अनेक परेशानी के बावजूद उस परीक्षा को देने का जुनून और मेहनत होती है जरूरी नहीं कि अधिक नम्बर से पास होने वाला व्यक्ति ही कुछ बेहतर करे कम अंक लाने वाला भी बहुत कुछ कर सकता है अगर उसे जीवन में कुछ करने की सोची 

नेहरू के जन्मतिथि को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है उन्हें बच्चे से बहुत लगाव था नेहरु का विचार था कि बच्चे उस गीली मिट्टी की तरह है जिसे जिस आकार में बना दिया जाए वो उस आकार में आ जाऐंगे.

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..