पहले किसी त्यौहार के आने से पहले ही उसकी खुशी और उमंग घरों में दिखाई देने लगती थी और बच्चों से लेकर बड़े भी इसके लिए इतने उत्साहित हो जाते थे जिसका रंग सभी पर चढ़ता दिखाई देता था पर अब जैसे हम आधुनिक होने की तरफ बढ़ रहे हैं वैसे वैसे हम सब की दिलचस्पी वैसी नहीं बची जैसे पहली थी.
इस कोरोना काल में हमारे त्यौहार को मनाने का तरीका और भी बदल गया है जहाँ लोग पहले की अपेक्षा अभी थोड़े खुश है तो कुछ
लोग इस आशा में है कि इस दिवाली के त्यौहार में उनकी थोड़ी पैसे की परेशानी खत्म होगी जिसके लिए वो कुछ हद तक सकरात्मक भी दिखाई दे रहे हैं उनकी ये परेशानी जल्द खत्म हो ऐसी हम दुआ करते हैं
आज के समय में वैसे तो किसी के पास इतना वक्त नही की वो रूककर ये सोचे की कोरोना से पहले और कोरोना के बाद उसका और उसके परिवार का गुजारा किस तरह से होगा फिर भी अब वो अपने काम को करने के लिए तैयार है इस उम्मीद के साथ की इस दिवाली उसके घर पर भी खुशियाँ आएगी.
" हम सब ज्यादा कुछ तो नहीं कर सकते किन्तु एक छोटा सा प्रयास जरूर कर सकते हैं कि हमारे आस पास सब्जी बेचने वाले से लेकर दिवाली के दीये बेचने वाली बूढ़ी दादी की सहायता करे और उनके दिये खरीदे गुलाब के फूल की जगह गेंदे के फूल की माला खरीदे."
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