तुने ही सिखाया है समानता का सार


संविधान एक देश की जान होता है जिसके अनुसार कोई देश चलता है भारत का संविधान सभी देश के संविधान से कुछ चीजों को लेकर बना जैसे भारत ने अमेरिका से नागरिकों के मौलिक अधिकार लिए तो वही आयरलैंड से राज्य के नीति निदेशक तत्व लिए दोनों की अपनी शक्ति है जहाँ मौलिक अधिकार नागरिकों को विवेक पूर्ण जीवन जीने की ताकत देता है तो वही राज्य के नीति निदेशक तत्व राज्य को ये शक्ति देता है कि वो उसे लागू करे या न करे.

आज हमारे आस पास क ई ऐसी घटना घटित हो रही है जो लोगों का कानून से विश्वास कही हद तक खत्म कर रही है तो वहीं संविधान को जानने समझने वाले लोगों का मानना है कि आज एक फिर हम सब को संविधान पढ़ने की जरूरत हुयी है जिसे हम सब अपने अधिकारों को तो जाने ही साथ साथ ही ऐसे लोगों के अधिकारों का सम्मान करें जिनके हित के लिए संविधान ने उन्हें विशेष अधिकार दिए है.

आज मौजूदा समय में हम सब को संविधान को पूरी तरह से समझने की जरूरत है जिससे एक ऐसे लोकतंत्र का निर्माण हो जो एक मिशाल बन सके और संविधान के अस्तित्व को बनाएं रखने में अपना योगदान दे.

" जब हमारे संविधान ने किसी को बड़ा या छोटा नहीं समझा तो हम फिर कोई उसे छोटा बड़ा दिखाने में लगे "


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