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दोस्ती और सपनों की अहमियत बताती है काई पोचे मूवी


*काई पोचे मूवी चेतन भगत के उपन्यास पर आधारित है जिसे अभिषेक कपूर ने बनायी है 

*काई पोचे का मतलब गुजरात में जब कोई किसी दूसरे की पतंग को काट लेता है तो वो खुशी में काई पोचे कहता है.

* ये अमित साध और सुशात सिंह की पहली मूवी है.

ये फिल्म तीन दोस्तों पर आधारित है जिसमें गोविन्द ( राजकुमार राव) इशांत ( सुशात सिंह राजपूत) और ओमी ( अमित साध) है

इस फिल्म की खूबसूरती यहाँ है कि इसमें कहीं भी बनावटी पन नहीं दिखाई देता है इसमें कोई भी हीरों के रूप में न होकर एक आम इंसान है जिनका सपना कुछ करने का है इसांत जो एक ओपनर बनना चाहता है तो गोविन्द हर काम के प्रबंधन से लेकर गणित का काफी अच्छा टीचर है ओमी का सपना कुछ नहीं है किन्तु गोधरा कांड के बाद वो अपने मामा के साथ इलेक्शन से लेकर बदला लेने तक उनका साथ देता है . 

इसके तीनों किरदार परिस्थितियों से लड़ते दिखाई देते हैं . 

तो वहीं इसमें एक नायिका  की भूमिका  विद्या ( अमृता पूरी )  है जो इस फिल्म में इंशात की बहन और गोविन्द की प्रेमिका है जिसे गणित नहीं पसंद है किन्तु बायोलॉजी उसकी पसंदीदा है विद्या एक अच्छी बहन और एक अच्छी प्रेमिका के रूप में दिखाई दी है.

अली के रूप में इस फिल्म में एक ऐसे लड़के की कहानी बतायी गयी है जो कि एक अच्छा बल्लेबाज हैं जिसको लेकर इशांत बहुत गम्भीर रहता है और उसे एक अच्छा बल्लेबाज बनाता है.


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..