अंग्रेजी माध्यम का भम्रजाल

 


इसके लेखक संक्रान्त सानु है इसका हिन्दी में अनुवाद 

सुभाष दुआ के द्वारा किया गया है.

ये किताब लेखों का संकलन  है

इसकी भूमिका में ही बताया जाता है कि भारत में केवल 4% लोग ही अंग्रेजी अच्छी तरह से लिखना और बोलना जानते हैं तब भी भारत में इस भाषा का बहुत महत्व है 

 जिसके चलते आज भारत में हिन्दी से ज्यादा अंग्रेजी सीखने का चलन बढ़ रहा है.

और हिन्दी भाषा उपेक्षित हो रही है 

आज भारत में  डॉक्टर और इंजीनियर जैसी पढ़ाई अंग्रेजी

भाषा में ही होती है जिसके चलते बच्चे पढ़ाई तो कर लेते है किन्तु नवाचार इस क्षेत्र में न के बराबर है

भारत में अंग्रेजी का वर्चस्व दिन दिन बढ़ता जा रहा है

ये किताब अंग्रेजी भाषा का उपयोग, हिन्दी की अवहेलना, दूसरे देशों के तुलना भारत में अपनी राजकीय भाषा के उपयोग जैसे विषयों एक साथ जोड़ती है. 

लेखों के बीच में एक लेख हम सब को गहन विचार करने को मजबूर करता है कि बच्चों को भले ही प्राथमिक शिक्षा हिन्दी और अन्य मातृभाषा में दी जाऐ किन्तु  कॉलेज अंग्रेजी भाषा में ही करना पड़ता है जिसके कारण हिन्दी और अन्य मातृभाषा में पढ़ने वाले बच्चे  कॉलेज 

में पिछड़ा जाते हैं

आज मौजूदा समय में हम सब को हिन्दी भाषा के साथ अन्य भाषा को भी महत्व देना होगा साथ ही साथ हम सब ही संस्कृत भाषा को   भी सीखना होगा . 

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