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नारी तू नारायणी हैं


आज का दिवस हम सब के लिए बहुत ही खास है जहाँ एक तरफ आज भारत के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती है तो वही दूसरी तरफ भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की आज पुण्य तिथि है दोनों ही का भारत के विकास में बहुत योगदान है जहाँ एक तरफ वल्लभ भाई पटेल ने क ई रियासतों को भारत में शामिल किया जिसमें हैदराबाद , जूनागढ़ भी हैं जिसे लौह पुरुष कहा जाता है जिसके जीवन की सादगी उसे शिखर की उस चोटी पर पहुंचाती है जहाँ पर जाना असंभव सा है जिसके जन्म दिवस को आज 'एकता दिवस' के रूप में मनाया जाता है . 

तो वहीं श्रीमती इंदिरा गांधी ने नारियों की एक अलग परिभाषा गढ़ी और बताया कि नारी हर चीज में अपना योगदान दे सकती है राजनीति के क्षेत्र में भी उसका योगदान हो सकता है

बाग्लादेश के निर्माण से लेकर सोवियत संघ से भारत की मित्रता कराने में इंदिरा गांधी की भूमिका बहुत अहम है.

किन्तु उनके द्वारा लगाई गयी आपातकाल को भूला नहीं जा सकता जिसने आम जनता से लेकर प्रेस तक की आज़ादी में प्रतिबंध लगा दिया जो भारत में एक काली परछाई के रूप में क ई समय तक रहा है.

इसके अलावा अगर उनके युग का विश्लेषण किया जाएं तो पाएंगे कि उन्होंने भारत के लिए हर जगह कुछ बेहतर करने की सोची.

इंदिरा गांधी पर नारी तू नारायणी हैं का श्लोक बिल्कुल ठीक बैठता है.

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..