मीराबाई जो एक कवयित्री है जिनका जन्म राजस्थान के मेवाड़ में हुआ था जिन्होंने बचपन में ही अपने पति के रूप श्री कृष्ण को मान लिया था किन्तु परिस्थितिवश उनका विवाह राणा सांगा के पुत्र भोजराज के साथ हो गया कुछ समय पश्चात मीरा ने खुद को कृष्ण मय बना लिया और वो संतों के साथ बैठकर कृष्ण की भक्ति में लग गयी.
उन पर अनेक तरह के अत्याचार कि ए गए हैं किन्तु वो कृष्ण की भक्ति में लीन रही.
और कृष्ण की दीवानी के रूप में जानी जाने लगी.
उनकी भाषा राजस्थानी मिश्रित भाषा है भारत के हिन्दी पघ साहित्य में भक्तिकाल की सगुण भक्ति धारा की कृष्ण भक्ति सखा में रैदास के बाद उनका महत्वपूर्ण स्थान है.
मीरा बाई भले ही आज पंचतत्व में विलीन हो गयी हो किन्तु उनकी भक्ति और श्रद्धा आज भी हमारे आस पास दिखाई देती है उनके भजन हमें श्री कृष्ण की भक्ति करने को मजबूर करते हैं.
आज मौजूदा समय में भगवान राम की उत्पत्ति होना तो मुश्किल है किन्तु कृष्ण की उत्पत्ति आज हुई है.
आज उनकी भक्ति हमें सीखा रही है कि मानों तो गंगा माँ है न मानो तो बहता पानी.

Comments