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ऐसी लागी लगन मीरा हो गयी मग्न

मीराबाई जो एक कवयित्री है जिनका जन्म राजस्थान के मेवाड़ में हुआ था जिन्होंने बचपन में ही अपने पति के रूप श्री कृष्ण को मान लिया था किन्तु परिस्थितिवश उनका विवाह राणा सांगा के पुत्र भोजराज के साथ हो गया कुछ समय पश्चात मीरा ने खुद को कृष्ण मय बना लिया और वो संतों के साथ बैठकर कृष्ण की भक्ति में लग गयी.

उन पर अनेक तरह के अत्याचार कि ए गए हैं किन्तु वो कृष्ण की भक्ति में लीन रही.

और कृष्ण की दीवानी के रूप में जानी जाने लगी.

उनकी भाषा राजस्थानी मिश्रित भाषा है भारत के हिन्दी पघ साहित्य में भक्तिकाल की सगुण भक्ति धारा की कृष्ण भक्ति सखा में रैदास के बाद उनका महत्वपूर्ण स्थान है.

मीरा बाई भले ही आज पंचतत्व में विलीन हो गयी हो किन्तु उनकी भक्ति और श्रद्धा आज भी हमारे आस पास दिखाई देती है उनके भजन हमें श्री कृष्ण की भक्ति करने को मजबूर करते हैं.

आज मौजूदा समय में भगवान राम की उत्पत्ति होना तो मुश्किल है किन्तु कृष्ण की उत्पत्ति आज हुई है.

आज उनकी भक्ति हमें सीखा रही है कि मानों तो गंगा माँ है न मानो तो बहता पानी.

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..