आज लड़कियो का स्कूल कॉलेज भेजना लोगों को खुद को आधुनिकता प्रतीक कहना है किन्तु वहीं आधुनिकता तब कहाँ चली जाती है जब उसे घर पर ही ये सीखाया जाता है कि ऐसी बातें जोर से नहीं किया करते घर के पुरूष के सामने तो बिल्कुल भी नहीं, और ऐसे वक्त में उस लड़की से कुछ घरों में तो ऐसा व्यवहार किया जाता है जैसे वो कोई अपवित्र वस्तु है जिसे छूना अपवित्र माना जाता है, उस समय उस लड़की के स्वास्थ्य को बिना जाने केवल उसे अनजान जैसा व्यवहार किया जाता है.
अगर आप लोगो के घर में ऐसी बाते बिना किसी संकोच के पुरुष के सामने कर दी जाती है तो आप थोड़े आधुनिक तो कहे ही जा सकते है.
आज महिला अपराध लगातार बढ़ रहे है जिसका एक कारण स्त्री की समस्या को गुत्त रहना , तो दूसरी ओर वही सारी चीजें डिजिटल माध्यम में बिना किसी बाधा के मिलना है जिस पर रोक लगाना अब जरूरी हो गया है.
आज समय हम से कह रहा है कि हम सब को बदलना होगा इसके लिए ये भी जरूरी है कि लड़के भी इस चीज को समझे अगर लड़की किसी चीज को लेकर मना कर रही है तो उसे न करे और इतना ध्यान रखें आप जितना दर्द एक साल में नहीं सहते हैं उतना वो हर माह झेलती है फिर वो आप से विनम्र और दयालु होती है जो लोग उसे कमजोर समझते हैं वो ये भूल जाते हैं कि वो दर्द से मिलकर बनी हुई व़ो कली होती है जिसको खिलने के लिए बहुत ताकत की जरूरत होती है अगर आप खुद को आधुनिक मानते हैं तो फिर सोच कर देखिए एक बार इस विषय पर भी.
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