रोज हम लोग आईने या कैमरे के सामने जाते हैं और खुद को उसमें देखते हैं और लगातार खुद को देखते रहते हैं भले ही जब हम कुछ नहीं बोल रहे होते किन्तु उस समय हम से कई लोगों की आंखों उनके काम का जुनून बोल रहा होता है कि उन्होंने क्या करना है और व़ो खुद को कैसे बेहतर कर सकते हैं.
हम से कुछ लोग आज भी सपने खुली आंखों से देखते हैं जिसें वो पूरा करने की सोचते हैं जिसके लिए वो मेहनत करते हैं खुद को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम करते हैं और खुद को तराशने के लिए खुद को ही चुनौती देते हैं और जब आईने के सामने जाते हैं तो एक अलग ही चमक उनकी आंखों में दिखाई देती है.
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