Skip to main content

नाच्यौ बहुत गोपाल बताती है कि प्रेम जाति नहीं पूछता


नाच्यौ बहुत गोपाल - अमृत लाल नागर 


'नाच्यौ बहुत गोपाल' अमृत लाल नागर के द्वारा लिखित  प्रसिद्ध उपन्यासों में से एक है  ∣

 इस उपन्यास का मुख्य पात्र एक पत्रकार शर्मा है ∣ जो अब तक सभी जाति के ऊपर कुछ न कुछ लिख चुका है ∣ अब वो अनुसूचित जनजाति के लोगों पर लिखना चाहता है ∣ इसके लिए  वो अपने नगर की सबसे प्रतिष्ठित निर्गुनियां से साक्षात्कार करना चाहता है ∣ जो इस उपन्यास की रीढ़  की हड्डी  है ∣

 पत्रकार शर्मा काफी मशक्कत के बाद निर्गुनियां से एक साक्षात्कार ले पाता है ∣ इस साक्षात्कार के माध्यम से निर्गुनियां अपने जीवन के उन रहस्यों का खुलासा करती है ∣ जो उसे लिए एक बुरे सपने की तरह है∣ जो इस उपन्यास को जिज्ञासु बन पढ़ने को पाठकों को मजबूर करता है ∣ जैसे जैसे निर्गुनियां साक्षात्कार के जरिए अपनी  कहानी कहती है∣  वैसे वैसे पाठकों की दिल की धड़कन बढ़ जाती है ∣  आखिर कहानी में आगे क्या होने वाला है? 


इस उपन्यास को पढ़ने का मुख्य कारण है कि ये उपन्यास केवल एक कहानी नही बल्कि हमारे समाज के एक वर्ग के उस दुख को बयां करता है ∣ इसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं ∣ 


वहीं इस उपन्यास का शीर्षक  'नाच्यौ बहुत गोपाल ' अपने नाम से ही हमारा ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है जिसका अर्थ जीवन को सार्थक बनाने के लिए कई  तरह के कष्ट को सहना है ∣

नाच्यौ बहुत गोपाल ' की भाषा अत्यंत सरल और सहज है  ∣ कहीं कहीं इसमें उर्दू गजलों का उपयोग किया गया है∣ जो इसकी भाषा में  चार चांद लगा देता है ∣

उदाहरण-

" इक लफ्ज़ मुहब्बत का इतना - सा फसाना है, 

सिमटे  तो दिल आशिक, फैले तो जमाना है"

 देशज विशेज शब्दों का भी इसमें उपयोग हुआ है∣



Comments

Unknown said…
बहुत सुंदर
धन्यवाद

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..