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बेटियों का भाग्य

 

आज से भारत में नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं जिसे मध्यप्रदेश से लेकर कोलकाता तक बड़ी धूम धाम से मनाते हैं.

इसे शारदीय नवरात्र भी कहते हैं और जगह जगह घट की स्थापना की जाती है सामूहिक गरबा आयोजित किया जाता है जिसकी धूम अहमदाबाद में सबसे अधिक होती है पंचमी से घरों घरों में कन्या भोज कराया जाता है जिसमें नौ कन्या ( लड़की) और एक लंगूर (लड़के) को खाना खिलाया जाता है जो नवमी तक चलता है 

औरत और पुरूष दोनों ही इसका उपवास बड़ी श्रध्दा के साथ करते हैं . 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की पत्नी जिन्हें गौरी के नाम से जाना जाता है उनके नौ रूप है जिनमें शैलपुत्री , ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिध्दिदात्री

इन नौ दिनों अलग अलग देवी की पूजा की जाती है.

और घरों घरों में भजन और झाकी पंड़ालो में जागरण किया जाता है.

बचपन में एक भजन ज़ो मुझे आज भी याद है वो आज की नारी की परिस्थिति को बहुत सही ढंग से कहता है

 बेटियो का भाग्य मैया तूने कैसा बनाया है,

सीता जैसी नारी को रावण ने सताया है,

उनके पति ने उनको घर से निकाला है,

बेटियो का भाग्य मैया.....

द्रोपदी जैसी नारी को दुर्योधन ने सताया है,

उनके पति ने उनको दांव पर लगाया है,

बेटियो का भाग्य मैया....

मीरा जैसी नारी को राणा ने सताया है,

उनके पति ने उनको जहर प्याला पिलाया है,

बेटियो का भाग्य मैया.......

अहिल्या जैसी नारी को राजा इंद्र ने सताया है,

उनके पति ने उनको पत्थर का बनाया है,

बेटियो का भाग्य मैया...

आज मौजूदा समय में भले घर की बेटी हो, पत्नी हो, बहन हो, माँ हो उसका सम्मान करना चाहिए.

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः 

जहाँ नारियों की पूजा होती है वहाँ देवता निवास करते हैं.

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खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

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पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..