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नजरिया


 कई बार हम किसी के बारे में जैसे सोचकर उसे मिलने जाते हैं वो वैसा नहीं होता है.

इसे हम ऐसे देख सकते हैं कि हम में से कुछ लोग आज भी किसी व्यक्ति से मिलते वक्त उसके कपड़े उसके रहन सहन पर ज्यादा ध्यान देते हैं वजऐ उसकी बातचीत और उसके बोलने के ढंग से.

और कुछ चीजों में तो हम अक्सर गलती कर ही देते हैं अगर हमें कोई व्यक्ति ज्यादा मजाकिया सा दिखाई देता है तो हम उसके बारे में एक अलग तरह का नजरिया बना लेते हैं वहीं अगर हमें कोई गम्भीर व्यक्ति मिल जाता है तो हम उसके बारे में सबसे पहला ख्याल यहीं करते हैं कि ये इंसान बहुत पकाऊं होगा.

जबकि अक्सर सच्चाई इसे भिन्न ही होती है और हमें बहुत बाद में ये समझ आता है कि हमारा नजरिया उसके बारे में बहुत गलत है.

आज मौजूदा समय में हम किसी का बोलना और बात करने के ढंग को तो नहीं सुधार सकते किन्तु हम अपना उसके लिए सोचने का नजरिया जरूर बदल सकते हैं .

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..