कई बार हम किसी के बारे में जैसे सोचकर उसे मिलने जाते हैं वो वैसा नहीं होता है.
इसे हम ऐसे देख सकते हैं कि हम में से कुछ लोग आज भी किसी व्यक्ति से मिलते वक्त उसके कपड़े उसके रहन सहन पर ज्यादा ध्यान देते हैं वजऐ उसकी बातचीत और उसके बोलने के ढंग से.
और कुछ चीजों में तो हम अक्सर गलती कर ही देते हैं अगर हमें कोई व्यक्ति ज्यादा मजाकिया सा दिखाई देता है तो हम उसके बारे में एक अलग तरह का नजरिया बना लेते हैं वहीं अगर हमें कोई गम्भीर व्यक्ति मिल जाता है तो हम उसके बारे में सबसे पहला ख्याल यहीं करते हैं कि ये इंसान बहुत पकाऊं होगा.
जबकि अक्सर सच्चाई इसे भिन्न ही होती है और हमें बहुत बाद में ये समझ आता है कि हमारा नजरिया उसके बारे में बहुत गलत है.
आज मौजूदा समय में हम किसी का बोलना और बात करने के ढंग को तो नहीं सुधार सकते किन्तु हम अपना उसके लिए सोचने का नजरिया जरूर बदल सकते हैं .
Comments