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भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाती है सत्याग्रह मूवी



" अपना करो सुधार तभी मिटेगा  भ्रष्टाचार"

सत्याग्रह मूवी जो मुख्य तौर पर सरकारी तंत्र में हो रहे भ्रष्टाचार को बताती है.

इसके  निर्देशक प्रकाश झा है
ये मूवी  अंबिका पूर की है जहाँ पर अभिताभ बच्चन का बेटा अखिलेश इंद्रनील सेन गुप्ता है इसमें एक पत्रकार की भूमिका में
   करीना कपूर  है तो वहीं अखिलेश के दोस्त के  पात्र में अजय देवगन है जो एक बिजनेस टायकून है तो वही अखिलेश की पत्नी के भूमिका में अमृता राव है.
इस  मूवी की कहानी कुछ इस तरह से है जहाँ अभिताभ बच्चन के बेटे  अखिलेश इंद्रनील की है जो एक इंजीनियर है जिस पुल का डिजाइन  वो करता है व़ो टूट जाता है
और एक दुघटना में उसकी मौत हो जाती है मंत्री बलराम अखिलेश के परिवार को मुआवजे के 25 लाख रूपये देते हैं किन्तु  भ्रष्टाचार के चलते व़ो उन्हें नहीं मिल पाते और फिर भ्रष्टाचार के विरोध में पहली आवाज उठती है पर उनको न्याय नहीं मिलता और फिर इस परिवार का साथ अखिलेश का दोस्त अजय देवगन, अमृता राव, अर्जुन रामपाल, और एक पत्रकार के रूप में यास्मीन ( करीना कपूर) देती है और सत्याग्रह शुरू होता है.

ये मूवी अन्ना हजारे के आंदोलन को बताती है भ्रष्टाचार  की वास्तविकताओं को बताने में सफल हुयी है.

आज समकालीन समय में ऐसा नहीं है कि भ्रष्टाचार नहीं हो रहे हैं किन्तु उनकी खबर बहुत कम ही सुनने को मिलती है.

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..