आज अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस है
इस कोरोना काल ने अगर किसी को सबसे ज्यादा किसी चीज से वंचित किया है "तो वो बच्चो का स्कूल जाना" है
स्कूल एक ऐसी जगह जहां पर बच्चा पढ़ना लिखना सीखता है।
आज हम याद करे अपने वो स्कूल के दिन तो हमें सबसे पहले शायद हमारी वो असम्बेली गाउंड याद आएगी जहां पर हम सब प्रेयर करते थे वो क्लास जिसमें अक्सर हम किसी नयी चीज को पढ़ते थे आज भी हम कहते हैं कि वो स्कूल के दिन अच्छे थे.
आज कोरोना का असर सबसे ज्यादा उन बच्चे पर पड़ा है जिन्होंने अभी दो तीन साल पहले ही स्कूल जाना शुरू किया था .
आज हम सब को इस विषय पर कुछ एक ऐसा कदम उठाने की जरूरत है जिसे बच्चे का स्कूल जाना कभी भी न छूटे और हर बच्चा स्कूल जाएं.
क्योंकि शिक्षा न केवल बच्चे को पढ़ना लिखना सिखाती है बल्कि वो उसके वो उसे उसकी हर जिज्ञासा का समाधान देती है और उसे कुछ बेहतर करने की सीख देती है.
'शिक्षा हम बहुत सारा ज्ञान तो थोड़ा व्यावहारिक जीवन जीने की प्रेरणा भी देती है'.
"रोके से न रूके हम
मर्जी से चले हम ,
स्कूल चले हम ".
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