सांस लेना अब मुश्किल हो गया है


हम से अधिकतर लोगों ने कभी न कभी चूल्हे की रोटी खायी होगी जिसका स्वाद आज भी हमारी जीभ  में होगा  लेकिन उस चूल्हे से निकलने वाले  धुंए के बारे में हमने कभी गौर ही नहीं किया  जबकि उसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है क्योंकि भारतीय देशों में ज्यादा तर महिला ही खाना पकाती है जिस कारण सांस लेने में दिक्कत आती है साथ ही गर्भवती महिला पर तो इसका असर पड़ता ही है उसकी कोख में पल रहे बच्चे पर भी उसका विपरीत असर दिखाई देता है.

आज उज्वला योजना उन स्त्री के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध हुयी है जो अब तक गैस सिलेंडर के उपयोग से वंचित थी.

इसके अलावा   ज्यादातर पुरुष वर्ग बीड़ी, सिगरेट पीते हैं उसे निकलने वाला धुंआ बहुत घातक होता है इसलिए जब अगली बार आपके सामने कोई व्यक्ति इसका उपयोग करते दिखे  तो

आप इसके धुंए से तो बचने की कोशिश करे  साथ ही साथ बच्चे को भी  इसके धुंए से  दूर रखे.

आज मौजूदा समय में हम सब की ये जिम्मेदारी है कि हम अपना वातावरण शुद्ध रखे.

"सांस लेना अब मुश्किल हो गया है,

वातावरण इतना दूषित हो गया है "

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