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सांस लेना अब मुश्किल हो गया है


हम से अधिकतर लोगों ने कभी न कभी चूल्हे की रोटी खायी होगी जिसका स्वाद आज भी हमारी जीभ  में होगा  लेकिन उस चूल्हे से निकलने वाले  धुंए के बारे में हमने कभी गौर ही नहीं किया  जबकि उसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है क्योंकि भारतीय देशों में ज्यादा तर महिला ही खाना पकाती है जिस कारण सांस लेने में दिक्कत आती है साथ ही गर्भवती महिला पर तो इसका असर पड़ता ही है उसकी कोख में पल रहे बच्चे पर भी उसका विपरीत असर दिखाई देता है.

आज उज्वला योजना उन स्त्री के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध हुयी है जो अब तक गैस सिलेंडर के उपयोग से वंचित थी.

इसके अलावा   ज्यादातर पुरुष वर्ग बीड़ी, सिगरेट पीते हैं उसे निकलने वाला धुंआ बहुत घातक होता है इसलिए जब अगली बार आपके सामने कोई व्यक्ति इसका उपयोग करते दिखे  तो

आप इसके धुंए से तो बचने की कोशिश करे  साथ ही साथ बच्चे को भी  इसके धुंए से  दूर रखे.

आज मौजूदा समय में हम सब की ये जिम्मेदारी है कि हम अपना वातावरण शुद्ध रखे.

"सांस लेना अब मुश्किल हो गया है,

वातावरण इतना दूषित हो गया है "

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

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पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..