आज के दौर में


जहाँ सादा जीवन उच्च विचार की परिभाषा ही बदल गयी है जहाँ लोगों को जज उनके कपड़े और वेषभूषा से किया जाता है.

आज भले ही हम कहे कि हम बहुत सादा जीवन जीने की कोशिश करते हैं किन्तु उनके वो दावे जब गलत हो जाते हैं जब वो कुछ ऐसा काम कर लेते हैं जो उनके इस दिखावे को पूरी तरह से गलत दिखाता है.

यू तो आज हर कोई अच्छा दिखाने के लिए खुद को हर दिन बेहतर बनाने की कोशिश में लगा रहता है किन्तु वो ऐसा करते वक्त वो ये बिल्कुल भूल जाता है कि उसकी खूबसूरती केवल उसके अच्छा दिखाने से ही है यह उसकी सादगी में है.

आज'  Beauty needs no ornaments' जैसा तो कुछ बचा ही नहीं है.

किन्तु तब भी  ये  विचार करने वाली बात है कि सादगी दिखावे में है यह सादा रहने में.

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