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बेटी बनकर आयी हूँ


यू तो आज पूरे देश में 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ 'का नारा जोर शोर से चल रहा है किन्तु क्या सच में आज बेटी बच रही है हर दूसरे दिन अखबार की खबर में बेटी के लिए आज भी कुछ नहीं बदला ये स्पष्ट तौर पर मालूम चलता है जहाँ एक नवजात जन्मी बेटी को तो मार दिया जाता है या तो उसे लापरवाही से उसे कही कूड़े दान में फेंक दिया जाता है.

यू तो हमारे देश में लड़की को लक्ष्मी माना जाता है किन्तु ये दुर्भाग्य की बात है कि उसी लक्ष्मी को इतनी क्रूरता से मारा जाता है जैसे वो लड़की न होकर कोई अभिशाप या कंस का काल हो.

मुझे नहीं पता कि लड़की की अपेक्षा लड़का माता पिता को कौन सा ऐसा बड़ा उपहार लाकर देगा जिसे बेटी नहीं दे सकती शायद इसकी वजह ये भी हो कि लड़की तो शादी के बाद अपने सुसराल चली जाती है वो तो जाती है साथ ही लाख दो लाख दहेज भी अपने साथ ले जाती है जिसके कारण लोग उसे लड़की कम बोझ ज्यादा समझते हैं 

ऐसा करते वक्त वो भूल जाते हैं कि जिसने उन्हें जन्म दिया वो भी एक लड़की थी बाद में वो माँ बनी . 

आज मौजूदा समय में सरकार के द्वारा लड़कियों के लिए बहुत सी योजना चलाई जा गयी है जिसमें मध्यप्रदेश में ही" लाडली लक्ष्मी योजना" है जिसके तहत लड़की को 5 और आठवीं कक्षा पास करने 4 से 5 हजार रूपये मिलते हैं तो वही 12 वी पास करने में भी 6 से 7 हजार मिल ही जाते हैं.

किन्तु योजना अपनी जगह है और मानसिकता अपनी जगह है आज भी लड़की भले आईएएस और आईपीएस बन जाए पर लड़को को दहेज देना ही होता है भले ही लड़के 10 वीं ही क्यों न पास हो.

"बेटी बनकर आयी हूँ 

माँ बाप के जीवन में

कल बसेरा होगा

मेरा किसी ओर के आंगन में , 

जाने की रीत बनाई 

ईश्वर ने बनायी होगी 

कहते हैं आज या कल तु परायी होगी 

जिन हाथों ने तुझको पालपोसकर बड़ा किया

कल वही हाथों ने तुझ को विदा किया."

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life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..