कुछ लिखने के लिए


कुछ लिखने के लिए कुछ पढ़ना उतना ही जरूरी है जितना परीक्षा देने के लिए पढ़ना किन्तु जिस तरह बिना पढ़ाई के बच्चे परीक्षा देने जाते हैं उसी तरह बिना पढ़े कुछ लोग बहुत कुछ लिख भी देते हैं.

आज अगर हमें कुछ रचनात्मक लेखन करना है तो उसके लिए हमें पहले पढ़ना भी होगा.

जिसे हम ये समझ सके कि एक बेहतर लेखन क्या होता है साहित्य को किस तरह गढ़ जाता है और किस तरह कुछ बेहतर लिखा जाता है ये हम तब ही समझ सकते हैं जब हम कुछ ऐसा पढ़े जो हमें ये बताएं कि एक अच्छा लेखन क्या होता है.

जिसे हम अपनी जिज्ञासा खत्म करने के लिए लगातार पढ़ते जाते हैं जो हम कहानी और उपन्यास के किसी पात्र को पूरी तरह से जानने के लिए लगातार पढ़ने को विवश त़ो करता है साथ ही साथ लेखन के अपने महत्व को भी बताता है.

आज मौजूदा समय में हमें बेहतर लेखन करने के लिए एक अच्छा साहित्य पढ़ने की जरूरत है भले वो लेखन अज्ञेय का हो निर्मल का हो या अमृतलाल नागर का "नाच्यौ बहुत गोपाल" हो.

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