आज जहाँ गूंजन सक्सेना जैसी लड़कियां आसमान तक पहुँच गयी है वही आज कुछ लड़कियाँ अपने घर से अकेले भी नहीं निकल पायी है उनके सपनों को पूरा करने की तो दूर की बात है.
लैंगिक समानता में भारत की रैक 112 वीं है इसके अलावा महिलाओं की उपस्थिति बाकी क्षेत्र की तुलना में सबसे ज्यादा एयरपोर्स में है तो वही सबसे प्रतिष्ठित सिविल सिविस में 2019 में केवल 23.7% ही महिला प्रतिभागी इसमें चुनी गयी है .
आज सभी महिलाओं को ग्लास सिलिंग से निकलने की जरूरत है.
जिसके लिए जरूरी है कि वो अपने ज्ञान को बढ़ाए और खुद के अस्तित्व को बनाए रखें.
आज समकालीन समय में भले ही महिलाओं की स्थिति में पहले की तुलना बदलाव क्यों न आए़ं हो किन्तु आज भी उनके साथ भेदभाव कम नहीं होता है आज जरूरी है समाज को अपने चेहरे से उस चश्मे को निकालना जिसने सदा उसके बारे में गलत ही सोचा है .
" जो सुबह होती है तो शाम भी होना जरूरी है,
जो बेटे की हर बात मानते
बेटी को सुनना भी जरूरी है,
तुम से भीख नहीं मांग रही वो
अपने हक के लिए मांग उठाना
भी जरूरी है,
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