हमारे देश में क ई ऐसी जनजाति पायी जाती है जो अपने स्तर पर न केवल अपना भरण पोषण कर रही है बल्कि व़ो पर्यावरण को भी सुरक्षित करने में अपना योगदान दे रही है .
उदाहरण के तौर पर मध्यप्रदेश की सहरिया जनजाति जिसका आज अपना अलग महत्व है ये जनजाति मुख्य रूप से जड़ी - बूटी की खेती करती है.बता दे कि सहरिया शब्द की उत्पत्ति फारसी भाषा के सहा से हुई है जिसका अर्थ 'वन ' से है इसका मुख्यालय शिवपूरी, गुना और ग्वालियर है.
आज समकालीन समय हमें उन जनजाति से सीख लेने की जरूरत है जो पर्यावरण को बचाने के लिए अपना योगदान दे रहे हैं .
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