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आज हम


कहने को तो केवल इस कोरोना वायरस ने हमें बदला हमारे सामने उन बदलावों को लाया जिनकी हमें जरूरत थी पर हमने कभी उसे नहीं अपनाया

 आईए आज बात करते हैं इन पहलूओं पर

१. हमारी शिक्षा प्रणाली - यू तो नयी शिक्षा जल्द ही हम सब के लिए आने वाली है किन्तु अभी उसे   लागू होने में बहुत  वक्त है .

आज भले ही हम  अपने आप को विश्व गुरु समझे किन्तु आज भारत की शिक्षा प्रणाली में बहुत विविधता है जिस कारण बच्चे बारहवीं तक भले ही किसी बोर्ड से पास होए किन्तु कालेज लगभग सबका साथ होता है.

किन्तु मुझे दक्षिण भारत की शिक्षा प्रणाली बहुत अच्छी लगी जहाँ बच्चे को बचपन से ही पढ़ाई के अलावा एक किसी क्षेत्र को चुनना होता है जिसमें उनकी रूचि होती और उसको लगन से सीखना होता.

जिसके चलते बच्चे आगे जाकर अपने रूचि के क्षेत्र में भी अपना करियर बना लेते हैं.

किन्तु हमारे क्षेत्र में बच्चे केवल पढ़ाई ही करते .

२. शिक्षा व्यावसायिक रूप में होना  - हमारी शिक्षा ऐसी होनी जरूरी  है जो

किसी एक क्षेत्र में विशेषज्ञता दिलाएँ.

३. तकनीकी का ज्ञान - यू तो आज हम फोन और लेपटाॅप का उपयोग बहुत ज्यादा कर रहे हैं किन्तु आज भी हम तकनीकी के मामले में बहुत पीछे है मैं ये तो नहीं कहती कि हम तकनीक का गुलाम बन जाएं किन्तु हमें तकनीक को समझना जरूरी है.

४. हर परिस्थिति को लेकर तैयार रहना - आज हम से ज्यादा लोग किसी काम को करने से पहले ही उसे छोड़ देते हैं जिसका एक कारण हमारी जानकारी की कमी तो दूसरा हमारी जल्दीबाजी होती है

और इसमें भी महत्वपूर्ण है कि हम किसी भी परिस्थिति का सामना कर सके इस काबिल हमें बनना होगा.

५. एल्गोरिथ्म को समझना- जिसका मतलब कठिन से कठिन जिस में से कुछ अहम बिन्दु को लेकर इसको सरल करना है आज इस क्षेत्र में  पहले कि तुलना में ज्यादा रोजगार है जिसमें प्रॉब्लम सोलविंग, किर्टिक  रिव्यू,.

 हम सभी को इस बात को बिल्कुल नहीं भूलना चाहिए आज हमारी एक लड़ाई खुद से भी है कि हम कितना कर पाते हैं.

" इम्तिहान का दौर है

गली गली में शौर है

किसी बाग में मोर है नाचता

त़ो जिंदगी में सुबह भौर है

तकलीफ सब है सहते

किन्तु आज देखने की बारी है

कि इसके हाथों में जोर है".

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..