अक्सर हम ये सोचते हैं कि हमें हर बड़ी चीज से लगाव है और हम केवल अच्छा ही सबकुछ देखना चाहते हैं लेकिन कई बार हमारे सामने जब विपरीत परिस्थितिया आकर खड़ी हो जाती है तब हमें मालूम चलता है कि उस चीज कि अहमियत क्या है.
इस चीज को हम ऐसे समझ सकते हैं कि एक ऐसा इंसान है जिसके पास हर चीज सीमित से भी सीमित मात्रा में है .
जिसके कारण वो ये सोचता है कि उसे बड़ी जगह पर सुकून मिलेगा .
लेकिन जब वो उस बड़ी चीज को देखता है तब उसे अपने उसी छोटी चीज की अहमियत मालूम चलती है जहाँ पर उसे समय के बारे में मालूम चलता है जहाँ सूरज निकलने से लेकर सूरज ढलने तक उसे ये मालूम रहता है कि आज उसका काम किन चीजों को करने में लगा.
'सुख कहाँ है
किसी ने कहाँ सुख पैसे में है
तो किसी ने कहा सुख
बड़ी चीजों में है,
सुख असली में तो वहीं है जहाँ
दुख है
क्योंकि दुख और सुख जीवन में यही कही है'
"आज जो लोग खुद से ये बहाने करते हैं न कि उनकों वक्त ही नहीं मिलता खुद के लिए कि वो कुछ करें उनको शांति वाली जगह ही नहीं मिलती कि वो क्या करें.
इन तमाम बहाने के अलावा हम कुछ बेहतर काम करे जो हमारे कल को आज से अब बेहतर करें ."
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